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चाँदनी रात में डाकबंगले के बरामदे में विचारमग्न लेखक की तंद्रा कैसे टूटी?

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लेखक विचारमग्न था। तभी सेन रवीन्द्रनाथ टैगोर की कोई कविता गाने लगा। उसे सुनकर लेखक की तंद्रा टूट गई।



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