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“बरफानी देशों में वह मानो विष्णु के समान क्षीरसागर में लेटा है।”- लेखक का यह कथन किसके बारे में है? ‘मजदूरी और प्रेम’ नामक निबंध के आधार पर उसका वर्णन कीजिए। |
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Answer» लेखक ने एक बूढ़े गड़रिये को देखा। जंगल में उसकी भेड़े पेड़ों की पत्तियाँ खा रही हैं। वह ऊन कात रहा है। उसके बाल सफेद हैं किन्तु मुख पर स्वास्थ्य की लालिमा है। जिस प्रकार भगवान विष्णु क्षीर-सागर में रहते हैं, उसी प्रकार वह बर्फीले प्रदेश में निवास करता है। उसकी दो जवान कन्यायें हैं। उन्होंने अपने माता-पिता तथा भेड़ों के सिवाय किसी को नहीं देखा है। उनका यौवन पवित्र है। वे पिता के साथ जंगल में घूमर्ती और भेड़े चराती हैं। उसकी पत्नी बैठी रोटी पका रही है। उसका परिवार बेमकान, बेघर तथा बेनाम है। वे जहाँ भी जाते हैं, एक कुटिया बना लेते हैं और प्रकृति के सान्निध्य में रहते हैं। उनके जीवन में बर्फ की पवित्रता तथा बर्फ की सुगंध है। भेड़ों की सेवा ही उनकी ईश्वर पूजा है। किसी भेड़ के बीमार होने पर वे दिन-रात उसकी देखभाल करते हैं। उसके ठीक होने पर वे मंगल मनाते हैं। उसकी कन्याओं को पहाड़ी गीत गाते और नाचते देखकर, उनकी सरलता, प्रकृति के प्रति निकटता, प्रेम, सेवा आदि के भाव देखकर लेखक के मन में उसके जैसा जीवन व्यतीत करने की इच्छा पैदा हुई । उसने समझा कि मूक जीवन से ही उसका कल्याण होगा। भौतिक ज्ञान से परमात्मा प्राप्त नहीं होता। पंडितों के तर्क-वितर्क बेकार हैं। सरल, पवित्र जीवन से ही परमात्मा को स्नेह प्राप्त होता है तथा मनुष्य का कल्याण होता है। |
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