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“बृहद अर्थशास्त्र विश्वव्यापी महामंदी की भेट हैं ।” विधान की चर्चा कीजिए ।

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बृहद अर्थशास्त्र का आधुनिक स्वरूप सन् 1929 में विश्वव्यापी महामंदी के कारण अस्त-व्यस्त हुए अर्थतंत्र को सुधारने के उद्देश्य से प्राप्त हुआ । अर्थशास्त्रीयों का विचार था कि बाजार तंत्रवाली अर्थव्यवस्था में स्वचालित समंजन की क्षमता है, जिसके कारण सारी अर्थव्यवस्था सदैव संतुलन में ही रहेगी, और किसी भी प्रकार के आर्थिक संकट को सुलझाने में बाजार तंत्र सक्षम है । परन्तु सन 1929 की विश्वव्यापी मंदी के संकट से निकलने में यह व्यवस्था असमर्थ रही । इसलिए इस विचार धारा पर प्रश्नचिहन लग गया, जिसकी वजह से बृहद अर्थशास्त्र का जन्म हुआ । आज के युग में बृहद स्तरीय आर्थिक विश्लेषण का आरम्भ इसी केंजीय सिद्धान्त से होता है ।



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