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बकरी पाती खात है, ताको खींचो खाल।जो नर बकरी खात है, ताको कौन हवाल।। 6 ।।​

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काटा कूटी जो करै, ते पाखंड को भेष

निश्चय राम न जानहीं, कहैं कबीर संदेस

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जो पशु को मारकर उसकी देह काटा करते हैं वह सब पाखंडी हैं और भगवान श्री राम को नहीं जानते-यही मेरा संदेश है।

बकरी पाती खात है, ताकी काढ़ी खाल

जो बकरी को खात है, तिनका कौन हवाल

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जो बकरी केवल घासी खाती है उसकी खाल खींच ली जाती है तो उन मनुष्यों का क्या हाल होता होगा जो बकरी का मांस खाते हैं।

वर्तमान संदर्भ में व्याख्या-आजकल समाज में मांस खाने का प्रचलन बढ़ रहा है और अंग्रेजी के आकर्षक नाम रखकर उसके खाद्य पदार्थ बनाये जाते हैं। सच तो यह है कि मांस भक्षण करने के लिये मनुष्य की देह उपयुक्त नहीं है और वर्तमान समय में हम देखें तो अनेक रोग इसी कारण फेल रहे हैं क्योंकि लोग गरिष्ठ भोजन कर रहे है।

मांस खाने से शरीर में मांस बढ़ता है और इससे हमारी नसों में रक्त प्रवाह बाधित होता हैं। एक बात यह याद रखने योग्य है कि हम वैसा ही सोचते और बोलते है जैसे तत्व हमारे रक्त में हेाते हैं। इतना ही नहीं हमारी देह से वैसे ही गंध भी निकलती है जिसके अनुरूप दूसरे लोगों पर हमारा अच्छा प्रभाव पढ़ता है। यह बहुत सूक्ष्म ज्ञान है पर इसकी तरफ लोगों का ध्यान नहीं जाता।

अतः हमें अपना खान-पान में अधिक से अधिक सात्विकता रखनी चाहिए ताकि हमारे तन, मन और विचारों में पवित्रता रहे और लोगों पर उसका अच्छा प्रभाव पड़े।



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