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बीती ताहि बिसारि दे, आगे की सुधि लेइ।जो बनि आवै सहज में, ताही में चित देइ।।ताही में चित देइ, बात जोई बनि आवै।दुर्जन हँसे न कोय, चित्त में खता न पावै।।कह गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती।आगे की सुधि लेइ, समझु बीती सो बीती।। explain |
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