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Answer» ong>Answer: बीजांडन्यास (PLACENTATION) अंडाशय के अन्दर बीजांडसन और बीजाण्डो के व्यव्स्थाक्रम को बीजाण्डन्यास कहते है | यह निम्नलिखित प्रकार का होता है – - सीमान्त (Marginal) : जब जायांग , एकअंडपी (अथवा बहुअंडपी , पृथकांडपी) और एककोष्ठीय हो और बीजांड एक पंक्ति में प्रतिपृष्ठ सीवनी पर लगे हुए हो , जैसे – मटर |
- सीवन अथवा सीवनी (SUTURE) : अंडप के तटों को सीवनी कहते है | मध्यशिरा वाले जोड़ को पृष्ठ सीवनी और तटों वाले जोड़ को प्रतिपृष्ठ सीवनी कहते है |
- भित्तीय (parietal) : जब जायांग दो अथवा बहुअंडपी परन्तु हमेशा युक्तांडपी और एककोष्ठीय हो और बीजाण्ड , अंडाशय की परिधि (भित्ति) पर अंडपो के संधि स्थल पर लगे हो , जैसे – द्विबीजपत्री पौधों में गण पेराइटेल्स के सदस्य |
- अक्षीय अथवा स्तम्भीय (AXILE) : जायांग द्विअंडपी से बहुअंडपी परन्तु सदैव युक्तांडपी और कोष्ठों की संख्या अंडपों के समान हो और बीजांड अंडाशय के केन्द्रीय भाग में स्थित अक्ष पर लगे हो , जिसका निर्माण अंडपों के तटों के संयोजन से होता है , जैसे – मालवेसी और सोलेनेसी कुलों के सदस्य |
- आधारीय (Basal) : जब जायांग एक अथवा बहुअंडपी और एककोष्ठीय हो और एक अथवा अधिक बीजांड कोष्ठ के आधारीय भाग अथवा फर्श पर लगे हो , जैसे – एस्टेरेसी कुल के सदस्य |
- मुक्तस्तम्भीय (FREE central) : जब जायांग द्वि अथवा बहुअंडपी युक्तांडपी परन्तु सदैव एककोष्ठीय हो , इसके आधारीय भाग अथवा फर्श से एक अक्ष इस प्रकार से उभरी हुई हो कि इसका जुड़ाव अंडाशय की छत अथवा शीर्ष से नहीं हो इस बीजांड और अक्ष पर लगे हो , जैसे – केरियोफिल्लेसी कुल के सदस्य |
- परिभित्तीय (superficial) : जब जायांग बहुअंडपी , युक्तांडपी और बहुकोष्ठीय हो और बीजांडकोष्ठों के पटों पर लगे हो , जैसे KAMAL
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