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भ्रष्टाचार की समस्या पर निबन्ध लिखें।

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भ्रष्टाचार का अर्थ है – अनैतिक अथवा अनुचित व्यवहार। आज देश में चारों ओर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो सारे देश का वातावरण बिगड़ सकता है। मनुष्य बड़ा लालची है। वह बहुत कुछ पाने के लिए अनैतिक मार्ग अपनाता है। इस प्रकार भ्रष्टाचार बढ़ता जाता है। भाषावाद, क्षेत्रीयता, जातीयता आदि से भी भ्रष्टाचार बढ़ता है।

भ्रष्टाचार के अनेक रूप हैं। चोरबाजारी, रिश्वतखोरी, दल-बदल, जोर-जबरदस्ती – ये सब भ्रष्टाचार के ही रूप हैं। धर्म का नाम लेकर लोग अधर्म का काम करते हैं। अधिकार, कुर्सी के लिए भी भ्रष्टाचार पनपता है। परिणामतः समाज में भय, आक्रोश व चिंता का वातावरण बनता है। यह हमारी व्यवस्था को बिगाड़ता है। भ्रष्टाचार विकास की प्रगति में बाधा है। आजकल सेना में भी इसकी चर्चा सुनी गई है जो हमारे लिए चिंता का विषय है।

भ्रष्टाचार किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज और देश की समस्या है। इनका पूर्णविनाश सामूहिक प्रयास से ही संभव है। इसके लिए शासन की इच्छा शक्ति होना जरूरी है। भ्रष्टाचार के आरोपियों को कठोर से कठोर दंड देना चाहिए। भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए सरकार, समाज और प्रत्येक नागरिक को मिलकर कार्य करना चाहिए। लगता है, हमारी शिक्षण प्रणाली में कई कमियाँ हैं, सामाजिक नैतिकता की कमी होना अच्छा नहीं है। आइए, हम संकल्प करें कि न हम रिश्वत देंगे और न रिश्वत लेंगे।



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