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भगवान से तुलसीदास के कौन-कौन से नाते हैं?

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तुलसीदास किसी-न-किसी प्रकार से भगवान की शरण में रहना चाहते हैं। इसलिए वे उनसे दयालु और दयापात्र, दाता और भिक्षुक, पतितपावन और पापी, अनाथों के नाथ और अनाथ का संबंध बताते हैं। इसके अतिरिक्त वे उन्हें अपने माता, पिता, गुरु और मित्र के रूप में भी देखते हैं। इस प्रकार तुलसीदास के भगवान से अनेक नाते हैं।



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