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‘भगत देखि राजी हुई, जगत देखि रोयी’ का आशय स्पष्ट कीजिए । |
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Answer» मीरा कृष्ण को ही जगत का सर्वस्व और सारतत्त्व समझती थी । इसीलिए कृष्णभक्ति में तन्मय भगत (भक्तों) को देखकर वह प्रसन्न होती थीं । जबकि सांसारिक मोह-माया में उलझे हुए जगत (लोगों) को देखकर उनकी मूर्खता पर रो पड़ती थीं। |
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