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भावार्थ स्पष्ट कीजिए:पानी गए न कबरै, मोती, मानुष चून।

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कवि रहीम कहते हैं कि पानी का बहुत महत्त्व है। बिना पानी के न मोती प्राप्त किए जा सकते हैं, न मनुष्य जीवित रह सकता है और न चूना खाने के योग्य चूना बनता है।

(इस दोहे का एक अर्थ यह भी है कि मोती की चमक चले जाने पर मोती न मोती रहता है, इज्जत या तेज न रह जाने पर आदमी न आदमी रह जाता है और बिना पानी के चूना चूना नहीं रह जाता।)



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