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भाव स्पष्ट कीजिए-चल रहा सुखद यह मलय-वात। |
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Answer» कवि दुखों से भरी रात में हिमकणों को दुख के आँसू कहता है। लेकिन अब प्रभात/ भोर हो चुकी है और शीतल मन्द सुगन्धित हवा अब चल पड़ी है। |
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