1.

भाव स्पष्ट कीजिए-चल रहा सुखद यह मलय-वात।

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कवि दुखों से भरी रात में हिमकणों को दुख के आँसू कहता है। लेकिन अब प्रभात/ भोर हो चुकी है और शीतल मन्द सुगन्धित हवा अब चल पड़ी है।



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