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भारतीय प्रजा ने विशिष्टता का संवर्धन और जतन किया यह अद्वितीय है ।

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प्राचीन भारत के ज्योतिर्धरों ने भारत की एकता पर अधिक बल दिया था जिससे देश को ‘भारत वर्ष’ नाम मिला ।

  • पवित्र गिनी जानेवाली सात नदियों का समावेश भारत की प्रार्थनाओं में भी किया गया है ।
  • ऋषि मुनियों, संतों, स्वामी विवेकानंद, दयानंद सरस्वती और गाँधीजी जैसे महापुरुषों ने हमेशा शांति, समन्वय और विश्वबंधुत्व की बातों पर बल दिया ।
  • विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान रही है ।
  • महासागरों में जैसे नदियों का संगम होता है हमारे देश में विविध धर्मों-संप्रदायों, जातियों, भाषाओं, रीति-रिवाजों, परंपरा, उत्सवों का समिश्रण पाया जाता है ।
  • भारत में विविध लोग सहअस्तित्व की भावना से अपना जीवन जीते हैं ।
  • भारतीय प्रजा ने हमारी इस विशिष्टता का संवर्धन और जतन किया है यह अद्वितीय है ।


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