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भारतीय परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए किस किस्म की सुरक्षा को वरीयता दी जानी चाहिए-पारम्परिक या अपारम्परिक? अपने तर्क की पुष्टि में आप कौन-से उदाहरण देंगे?

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यदि भारतीय परिदृश्य पर गौर किया जाए तो यह स्पष्ट हो जाता है कि भारतीय सुरक्षा को पारम्परिक व अपारम्परिक दोनों ही प्रकार के खतरे हैं। अत: पारम्परिक व अपारम्परिक दोनों ही प्रकार की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है।

उदाहरण के लिए, भारत के लिए पड़ोसी देशों विशेषकर पाकिस्तान व चीन से पारम्परिक सैन्य खतरा बना हुआ है। पाकिस्तान ने 1947-48, 1965, 1971 तथा 1999 में तथा चीन ने 1962 में भारत पर आक्रमण किया था। पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमता का विस्तार कर रहा है तथा चीन की सैन्य क्षमता भारत से अधिक है। दूसरी तरफ भारत के कई क्षेत्रों, यथा-कश्मीर, नागालैण्ड, असम आदि में अलगाववादी हिंसक गुट तथा कुछ क्षेत्रों में नक्सलवादी समूह सक्रिय हैं। अत: भारत की आन्तरिक सुरक्षा को भी खतरा है।
ये खतरे पारम्परिक खतरों की श्रेणी में शामिल हैं। जहाँ तक अपारम्परिक सुरक्षा का सम्बन्ध है, भारत में प्रमुख चुनौती पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवादी गतिविधियों से है। आतंकवाद का विस्तार भारत में निरन्तर हो रहा है। अयोध्या व काशी में विस्फोट, मुम्बई में विस्फोट तथा संसद पर आतंकवादी हमला इसके उदाहरण हैं। अत: भारत को आतंकवाद से निपटने के लिए अपारम्परिक सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा। अपारम्परिक सुरक्षा की दृष्टि से एड्स जैसी महामारियों की रोकथाम, मानवाधिकारों की रक्षा, जातीय व धार्मिक संघर्ष, निर्धनता व स्वास्थ्य की समस्या का समाधान भी आवश्यक है।
निष्कर्षतः भारत में पारम्परिक व अपारम्परिक दोनों ही सुरक्षा तत्त्वों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।



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