|
Answer» कृषि के पिछड़ेपन के कारण-भारत की कृषि के पिछड़ेपन के अग्रलिखित कारण हैं — - कृषि की वर्षा पर निर्भरता — भारत का किसान सिंचाई के लिए अधिकतर वर्षा पर निर्भर है, परन्तु वर्षा अविश्वसनीय तथा अनिश्चित होने के कारण हमारी कृषि पिछड़ी हुई है।
- भूमि में नाइट्रोजन का अभाव — भारत की भूमि में नाइट्रोजन की कमी है। इसका कारण यह है कि हज़ारों साल से हमारी भूमि पर कृषि हो रही है। इसके कारण हमारी भूमि की उपजाऊ शक्ति काफी कम हो गई है।
- उचित श्रम का अभाव — हमारे कृषक दुर्बल हैं। परिणामस्वरूप वे इतना परिश्रम नहीं कर पाते जितना कि कृषि के लिए आवश्यक है।
- खेतों का अपघटन — हमारे देश में पिता की मृत्यु के बाद भूमि उसके बेटों में बंट जाती है। इस प्रकार खेतों के आकार छोटे होते जाते हैं जिससे उत्पादन कम हो जाता है।
- कृषि के पुराने ढंग — भारतीय किसान अभी तक पुराने ढंग से कृषि कर रहा है। इस कारण हमारी कृषि पिछड़ी
- अच्छे बीजों का प्रयोग न करना — निर्धन होने के कारण भारतीय कृषक अच्छे बीजों का प्रयोग नहीं कर पाते। अतः हमारे खेतों में उपज कम होती है।
- धन का अभाव — कृषि के लिए धन की बड़ी आवश्यकता होती है, परन्तु भारतीय कृषक निर्धन हैं।
- दुर्बल पश — भारतीय किसान बैलों की सहायता से अपने खेतों में हल चलाता है। परन्तु हमारे यहां के अधिकतर बैल अच्छी नस्ल के नहीं हैं। ये बैल दुर्बल होते हैं। इनसे कृषि का पूरा कार्य नहीं लिया जा सकता।
- निरक्षरता — भारतीय किसान निर्धन होने के अतिरिक्त निरक्षर भी हैं। अत: वह कृषि के नए ढंग अपनाने में कठिनाई अनुभव करता है।
कृषि की दशा सुधारने के उपाय-कृषि की दशा में सुधार लाने के लिए निम्नलिखित पग उठाए जा सकते हैं — - सहकारी कृषि- सहकारी कृषि की प्रणाली जारी करनी चाहिए। इससे खेत बड़े हो जाएंगे और सभी सुविधाएं प्राप्त हो जाएंगी।
- सिंचाई की अधिक सुविधाएं- कृषि की स्थिति में सुधार लाने के लिए सिंचाई की सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिएं।
- गहन खेती- हमारे देश में किसान को गहन कृषि के ढंगों को अपनाना चाहिए। इससे भूमि की शक्ति बढ़ जाती है और थोड़ी-सी भूमि से भी अधिक ऊपज प्राप्त होती है।
- अच्छे बीज और खाद- सरकार को चाहिए कि वह किसानों को सस्ते दामों पर अच्छे बीज दे। अच्छी खाद खरीदने के लिए उन्हें सरकार द्वारा सहायता मिलनी चाहिए।
- नवीन कृषि यत्रों का प्रयोग - यदि कृषि के नवीन यन्त्रों का प्रयोग किया जाए तो कृषि में काफी सुधार हो सकता है। सरकार को इन औजारों को खरीदने के लिए कृषक की धन से सहायता करनी चाहिए।
|