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भारत में भूमि के विभिन्न उपयोगों के प्रारूप की जानकारी दीजिए।

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भूमि एक अति महत्त्वपूर्ण संसाधन है। भारत का कुल क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग कि०मी० है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश की कुल भूमि के 92.7 प्रतिशत भाग का उपयोग हो रहा है। यहां भूमि का उपयोग मुख्यत: चार रूपों में होता है —

  1. कृषि,
  2. चरागाह,
  3. वन,
  4. उद्योग, यातायात, व्यापार तथा मानव आवास।

1. कृषि- भारत के कुल क्षेत्रफल के लगभग 56 प्रतिशत भाग पर कृषि की जाती है। देश में 16.3 करोड़ हेक्टेयर … भूमि शुद्ध बोये गए क्षेत्र के अधीन है। 1.3 प्रतिशत भाग फलों की कृषि के अन्तर्गत आता है। पाँच प्रतिशत क्षेत्र में परती भूमि है।

2. चरागाह- हमारे देश में चरागाहों का क्षेत्रफल बहुत ही कम है। फिर भी यहां संसार में सबसे अधिक पशु पाले जाते हैं। इन्हें प्रायः पुआल, भूसा तथा चारे की फसलों पर पाला जाता है। कुछ ऐसे क्षेत्रों में भी पशु चराये जाते हैं, जिन्हें वन क्षेत्रों के अन्तर्गत रखा गया है।

3. वन- हमारे देश में केवल 22.7 प्रतिशत से भी कम भूमि पर वन हैं। आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था तथा पारिस्थितिक सन्तुलन के लिए देश के एक-तिहाई क्षेत्रफल में वनों का होना आवश्यक है। अतः हमारे देश में वन-क्षेत्र वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत कम है। भूमि उपयोग के आंकड़ों के अनुसार यहां वनों का विस्तार 6.7 करोड़ हेक्टेयर भूमि में है। परन्तु उपग्रहों द्वारा लिए गए छाया चित्रों के अनुसार यह क्षेत्र केवल 4.6 करोड़ हेक्टेयर ही है।

4. उद्योग, व्यापार, परिवहन तथा मानव आवास- देश की शेष भूमि या तो बंजर है या उसका उपयोग उद्योग, व्यापार, परिवहन तथा मानव आवास के लिए किया जा रहा है। परन्तु बढ़ती जनसंख्या तथा उच्च जीवन-स्तर के कारण मानव आवास के लिए भूमि की मांग निरन्तर बढ़ती जा रही है। परिणामस्वरूप अन्य सुविधाओं के विकास के लिए भूमि का निरन्तर अभाव होता जा रहा है।
इस प्रकार स्पष्ट है कि भारत में भूमि का उपयोग सन्तुलित नहीं है। अतः हमें भूमि के विभिन्न उपयोगों में सन्तुलन बनाए रखने के लिए प्रयत्न करना चाहिए।



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