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Answer» भारत और चीन के बीच विवाद के मामले 1. सीमा विवाद–चीन ने कुछ ऐसे मानचित्र प्रकाशित किए जिनमें भारतीय भू-भाग पर चीनी दावा किया गया था। यहीं से सर्वप्रथम सीमा-विवाद प्रकट हुआ। चीन ने पाकिस्तान के साथ सन्धि करके कश्मीर का कुछ भाग अपने अधीन कर लिया जिसे तथाकथित पाकिस्तान द्वारा हथियाए गए कश्मीर का हिस्सा माना जाता है। चीन, भारत के एक राज्य अरुणाचल प्रदेश पर भी अपना दावा करता है। 2. 1962 में सैनिक मुठभेड़ और असफलता–सन् 1962 में सैनिक मुठभेड़ की असफलता का परिणाम चीन के साथ सम्बन्धों में कटुता आना रहा। सन् 1979 में वियतनाम पर हमला करते समय चीन ने यह घोषणा की थी कि दण्डानुशासन वाली यह कार्रवाई सन् 1962 के नमूने पर ही की गयी थी। इस तरह के वक्तव्यों को अनसुना करना असम्भव है। 3. विश्व व्यापार संगठन में एक जैसी नीतियों को अपनाना-चीन और भारत दोनों ही विकासशील हैं। अत: विकास के लिए विश्व व्यापार संगठन में समान नीति अपनाते हैं। समान नीति के कारण प्रतिद्वन्द्विता की भावना पैदा होती है। 4. भारत द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण–चीन, भारत के परमाणु परीक्षणों का विरोध करता है। सन् 1998 में भारत द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण का चीन ने काफी विरोध किया जबकि वह स्वयं परमाणु अस्त्र-शस्त्र रखता है। भारत-चीन मतभेद दूर करने के सुझाव 1. सांस्कृतिक सम्बन्धों का निर्माण–चीन और भारत दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सम्बन्ध सुदृढ़ हों। भाषा और साहित्य का आदान-प्रदान हो। एक-दूसरे के देश में लोग भाषा और साहित्य का अध्ययन करें। 2. नेताओं का आवागमन-दोनों ही देशों के प्रमुख नेताओं का एक-दूसरे देश में आना-जाना रहना चाहिए ताकि वे अपने विचारों का आदान-प्रदान कर सकें जिससे कि सद्भाव और सहयोग की भावना पैदा हो। 3. व्यापारिक सम्बन्ध-दोनों ही देशों में तकनीक सम्बन्धी सामान व व्यक्तियों का आदान-प्रदान हो, कम्प्यूटर आदि के आदान-प्रदान से भारत और चीन दोनों देशों में आन्तरिक व्यापार को बढ़ावा दिया जा सकता है। 4. आतंकवाद पर संयुक्त दबाव-भारत और चीन आतंकवाद को समाप्त करने में एक-दूसरे का सहयोग कर सकते हैं और ऐसे देशों पर दबाव डाल सकते हैं जो आतंकवादियों को शरण देते हैं। यह तभी हो सकता है जब दोनों ही देश संयुक्त रूप से दबाव डालें। 5. पर्यावरण सुरक्षा समस्या का समाधान-दोनों ही देश पर्यावरण सुरक्षा की समस्या का संयुक्त रूप से समाधान कर सकते हैं और एक-दूसरे देश में प्रदूषण फैलाने वाली समस्या को दूर करने में सहयोग कर सकते हैं। 6. विभिन्न क्षेत्रों में मैत्रीपूर्ण वातावरण तैयार करके-चीन और भारत तिब्बत शरणार्थियों और तिब्बत से जुड़ी समस्याओं, ताइवान की समस्या के समाधान और भारतीय सहयोग एवं नैतिक समर्थन बढ़ाकर, निवेश को बढ़ाकर, मुक्त व्यापार नीति, वैश्वीकरण और उदारीकरण, संचार-साधनों में सहयोग करके एक मैत्रीपूर्ण वातावरण बना सकते हैं। निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि परस्पर सहयोग एवं बातचीत द्वारा दोनों देशों के बीच दूरी कम हो सकती है और जो मनमुटाव की स्थिति रही है वह समाप्त की जा सकती है। संघर्ष से व्यवस्था को कभी गति नहीं . मिलती। सहयोग से विकास होता है और अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर सम्मान बढ़ता है।
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