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बहादुरी से संबंधित कोई छोटी सी कहानी लिखिए। |
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Answer» उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर जिले में ताजपुर एक छोटा – सा रेलवे स्टेशन है। रेलवे लाइन के पास से अक्षय कुमार नामक एक छात्र अपना कॉलेज जा रहा था। अचानक उसकी दृष्टि रेल की पटरी पर पड़ी। उसने देखा कि एक जगह पर कुछ दूर तक रेल की पटरी उखड़ी हुई थी। उसने उसके पास जाकर गौर से देखा। ‘फ़िश – प्लेटों’ के हटाये जाने से वहाँ एक भयानक खतरा पैदा हो गया था। अक्षय कुमार के सामने एक यात्री – गाड़ी तेज़ी से चली आ रही थी। उसने चारों ओर देखा । दूर तक कोई भी आदमी नहीं था। वह बहुत परेशान हो गया । बेचारे की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। केवल कुछ ही क्षण बाकी थे सैकड़ों आदमी मृत्यु के मुँह में जानेवाले थे । अचानक उसे एक उपाय सूझा। अक्षय कुमार पटरियों के बीच में खड़ा होकर दोनों हाथ उठा – उठाकर हिलाने लगा। लेकिन गाड़ी पूरे वेग के साथ धड़ – धड़ करती हुई आ रही थी। अब क्या किया जाये? अक्षय कुमार को एक नयी बात सूझ गयी। वह अपना कोट उतारकर उसे तेज़ी से हिलाने लगा। इस बार ड्राइवर ने उसे देख लिया। उसने पूरा बल लगाकर गाड़ी रोक दी। गाड़ी उसके बिलकुल पास आकर रुक गयी। इंजन तो अक्षय कुमार से दो फुट की दूरी पर आकर रुका था। लेकिन उसे अपने प्राणों की चिन्ता नहीं थी ; वह एक इंच भी पीछे नहीं हटा। अक्षय कुमार ने गाड़ी को रोक दिया था, इससे ड्राइवर नाराज़ हो गया। वह इंजन से उतरकर लड़के के पास आया। इतने में उस गाड़ी का गार्ड भी नीचे उतर आया। तभी सबकी नज़र पटरी पर पड़ी। वहाँ तो मौत सैकड़ों लोगों की जान लेने तैयार बैठी थी। सब एक क्षण के लिए घबरा गये। ड्राइवर और गार्ड अक्षय कुमार के उस महान कार्य के लिए धन्यवाद देने लगे। मगर अक्षय कुमार को अधिक बातचीत करने की फुरसत नहीं थी। कॉलेज में घंटी बजने का समय था और वहाँ पहुँचने में देर हो रही थी। इसलिए वह जल्दी – जल्दी वहाँ से चल पड़ा। अक्षय कुमार की कर्तव्य – भावना और साहस से सैकड़ों लोग उस दिन मौत के मुँह से बच गये। देश ने अक्षय कुमार के इस महान गुण का अच्छा सम्मान किया। भारत के राष्ट्रपति ने इस वीर युवक को ‘अशोक – चक्र’ प्रदान किया। |
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