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'बेटी के नाम पत्र' पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

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यह “पत्र लेखन” पाठ है। इसे नैनी जेल से 26 अक्तूबर, 1930 को श्री जवाहर लाल नेहरू जी ने अपनी बेटी इंदिरा के नाम पर लिखा।

इंदिरा के जन्मदिन के उपलक्ष्य में पिता नेहरू जी उसे जन्म दिन की शुभकामनाएँ बताते हुए इस पत्र को लिखते हैं। एक महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए असीम उत्साह के साथ रहने का संदेश नेहरू जी इंदिरा को देते हैं। उसे वीरांगना बनने का आदेश तथा संदेश देते हैं।

बापू जी के द्वारा छेडे गये स्वतंत्र आंदोलन तथा भारत देश के इतिहास का निर्माण के बारे में बताते हैं। नेहरू जी अपनी बेटी को पत्र में यह भी बताते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन उनकी आँखों के सामने होते रहने के कारण वे बहुत भाग्यशाली हैं। इस महान आंदोलन में उनके कर्तव्य के बारे में बताते हैं। क्या करें और क्या न करें के बारे में बताते हैं। गलत काम न करने का संदेश देते हैं। बहादुर बनने का संदेश देते हैं। भारत की सेवा के लिए बहादुर सिपाही बनने का संदेश देते हुए पत्र को समाप्त करते हैं।



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