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बेल साहब ने गाँधी के जीवन-प्रवाह को किस तरह प्रभावित किया?

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गाँधी जी सभ्य कहलाने का प्रयत्न कर रहे थे और उन्होंने अपने जीवन में बहुत परिवर्तन करने का प्रयास भी किया। लेकिन बेल साहब ने उनके जीवन-प्रवाह को बदल दिया। उन्होंने सोचा कि मुझे इंग्लैण्ड में नहीं रहना है। इसलिए लच्छेदार भाषण बन्द कर दिया । नाचना सीखना छोड़ दिया क्योंकि इससे सभ्य नहीं बना जा सकता। वायोलिन सीखना भी बन्द कर दिया और उसे बेचने के लिए कहा। वायोलिन अपने देश में भी सीखा जा सकता था। वायोलिन शिक्षिका ने भी उनकी बात का समर्थन किया। बेल साहब ने गाँधीजी को सभ्य बनने की सनक को समाप्त करके उनके जीवन-प्रवाह को ही बदल दिया।



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