1.

बदलूकोकिसीबातसेचिढ़थीतोकाँचकीचूड़ियोंसे'औरबदलूस्वयंकहताहै-जोसुंदरताकाँचकीचूड़ियोंमेंहोतीहैलाखमेंकहाँसंभवहै?''येपंक्तियाँबदलूकीदोप्रकारकीमनोदशाओंकोसामनेलातीहैं।दूसरीपंक्तिमेंउसकेमनकीपीड़ाहै।उसमेंव्यंग्यभीहै।हारेहुएमनसे,यादुखीमनसेअथवाव्यंग्यमेंबोलेगएवाक्योंकेअर्थसामान्यनहींहोते।कुछव्यंग्यवाक्योंकोध्यानपूर्वकसमझकरएकत्रकीजिएऔरउनकेभीतरीअर्थकीव्याख्याकरकेलिखिए।

Answer»

बदलू
को
किसी
बात
से
चिढ़
थी
तो
काँच
की
चूड़ियों
से'
और
बदलू
स्वयं
कहता
है
-
जो
सुंदरता
काँच
की
चूड़ियों
में
होती
है
लाख
में
कहाँ
संभव
है?''
ये
पंक्तियाँ
बदलू
की
दो
प्रकार
की
मनोदशाओं
को
सामने
लाती
हैं।
दूसरी
पंक्ति
में
उसके
मन
की
पीड़ा
है।
उसमें
व्यंग्य
भी
है।
हारे
हुए
मन
से,
या
दुखी
मन
से
अथवा
व्यंग्य
में
बोले
गए
वाक्यों
के
अर्थ
सामान्य
नहीं
होते।
कुछ
व्यंग्य
वाक्यों
को
ध्यानपूर्वक
समझकर
एकत्र
कीजिए

और
उनके
भीतरी
अर्थ
की
व्याख्या
करके
लिखिए।



Discussion

No Comment Found