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बच्चनजी तेज बुखार मे लेखन का अधिक काम करते थे क्योकी...अ) बुखार को महत्व देना वे सीखे ही न थे। ब) बुखार के कारण उन्हें बाहरी कामो से फुरसत मिल जातीथी।क) बुखार के ताप से उनकी अनुभूतियाँ और कल्पनाए अधिक क्रियाशील बन जाती थी। |
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