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‘बचाएँ डूबने से, पूरी की पूरी बस्ती हड़िया में’ – आशय स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» शराब आदिवासियों के जीवन से जुड़ी हुई एक अभिन्न समस्या है। खुशी और गम दोनों ही प्रसंगों में आदिवासी लोग प्रायः शराब का सेवन करते हैं। इसका एक कारण उनकी जीवन-शैली, श्रमशीलता, अशिक्षा, अज्ञानता और जीवन की मस्ती भी है। कवयित्री निर्मला पुतुल ने शराब के कारण आदिवासियों की जिंदगी बरबाद होते देखा था। इतना ही नहीं वह जिस इलाके में रहती थी वहाँ के आदिवासी हंडिया दारू बनाने और बेचने का धंधा करते थे। यह दारू पीने के बहाने कई बाहरी-शहरी लोग उस बस्ती में आते थे। हुड़दंग मचाते थे। हँसी ठट्ठा, गाली-गलौज, मारपीट आम बात थी। उनकी बहु-बेटियों की इज्जत से खेलते थे। शराब के नशे में उन्हें लोभ-लालच बताकर महत्त्वपूर्ण कागज़ात पर हस्ताक्षर करवा लेते थे। इसीलिए निर्मला पुतुल आदिवासियों की पूरी की पूरी बस्तियों को शराब में डूबने (बरबाद होने) से बचाने का आग्रह करती है। |
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