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अर्थशास्त्र विषय के महत्त्व की चर्चा कीजिए ।अथवाअर्थशास्त्र के उद्देश्यों की चर्चा कीजिए ।

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वर्तमान समय आर्थिक युग है । मनुष्य प्रत्येक प्रवृत्ति लाभ और हानि की तुलना के साथ करता हैं । बहुत ऐसे कम लोग हैं जो बिल्कुल निःस्वार्थ भाव से काम करता है । आर्थिक बातों से दूर रह सके ऐसा संभव नहीं है । इसलिए अर्थशास्त्र विषय का महत्त्व बढ़ जाता है ।

अर्थशास्त्र का महत्त्व दो दृष्टि से देख सकते हैं :
(1) व्यवहारिक महत्त्व
(2) व्यावसायिक महत्त्व

(1) व्यवहारिक महत्त्व :

अर्थशास्त्र अपने दैनिक जीवन के साथ जुड़ा हुआ है । अर्थशास्त्र का महत्त्व अपने व्यवहारिक महत्त्व निम्नानुसार है :

(i) अंतरराष्ट्रीय घटनाएँ : आज के समय में आर्थिक बातें ही अंतर्राष्ट्रीय बातों को असर करती हैं । अमेरिका क्यों सुपर पावर है ? क्रूडतेल का भाव बढ़ता-घटता है । रशिया और अमेरिका, चीन और भारत में कौन-सी आर्थिक समानता और अंतर है । कौनसा देश पूँजीवाद है और कौन-सा देश साम्यवादी ? इस जानकारी के आधार पर अपने किस देश के साथ सरलता से व्यवहार कर सकते हैं, वह समझ सकते हैं ।

(ii) ऐतिहासिक घटनाएँ : तेजपत्ता और गरम मसाले का भाव बढ़ा इसके लिए इंग्लैण्ड के व्यापारियों ने ईस्ट इण्डिया कंपनी की स्थापना करके भारत में व्यापार किया फिर कूट नीति से सत्ता स्थापित की । रोजगार और उद्योग धंधे नष्ट हुए, ऊँचे टेक्स के त्रास से भारतीय प्रजा ने अंग्रेजों के शासन का विरोध किया । देश-दुनिया में भाववृद्धि, अधिक टेक्स, कमी जैसे आर्थिक परिबल राजनैतिक अव्यवस्था सर्जित । करते हैं । इस प्रकार ऐतिहासिक घटनाओं के अनुभव से वर्तमान तथा भविष्य की नीति निर्माण में सहायता मिलती है ।

(iii) दैनिक निर्णय के लिए : डॉक्टर, वकील, गायक, शिक्षक, अभिनेता भी आर्थिक निवेश करते हैं । सीधे-सीधे से आर्थिक प्रवृत्ति से न जुड़े होने पर भी बचत और पूँजी निवेश, आय और खर्च की प्रवृत्ति से जुड़े होते हैं । गृहिणी से लेकर सरकार तक लोगों को निर्णय लेने में अर्थशास्त्र का अध्ययन उपयोगी होता है ।

(iv) सरकार की नीतियाँ समझने के लिए : भारत जैसे देशों में सरकार मुद्राकीय नीति, राजकोषीय नीति और आर्थिक नीति अपने दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं । इसलिए अर्थशास्त्र के अध्ययन से इस नीतियों को समझने तथा उसके अनुसार निर्णय लेने में सहायक होता है । जैसे : रिजर्व रेपोरेट के परिवर्तन के अनुसार अपने बचत और निवेश से सम्बन्धित निर्णय ले सकते हैं ।

(2) व्यावसायिक महत्त्व :

अर्थशास्त्र का अध्ययन व्यावसायिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है । आय और खर्च, माँग और पूर्ति यह सभी बातें व्यवसाय से जुड़ी हैं । अर्थशास्त्र का अध्ययन प्रत्येक व्यवसाय की आर्थिक गणना में सहायक है । वस्तु या सेवा के सम्बन्ध में कीमत – निर्धारण, साधन तथा कच्चा माल का क्रय-विक्रय, श्रमिक या कर्मचारियों के वेतन निश्चित करने जैसी तमाम बातों सम्बन्धित निर्णय में अर्थशास्त्र का अध्ययन सहायक हैं । जैसे : तीव्र स्पर्धावाले बाजार में कीमत कम करने से ग्राहकों को आकर्षित कर सकते हैं ।

अर्थशास्त्र मूलभूत रूप से आर्थिक निर्णय में सहायक होनेवाला शास्त्र है और उसका व्यावसायिक महत्त्व है । आर्थिक संसार. में मनुष्य के तीन स्वरूप हैं : (1) ग्राहक (2) उत्पादक (3) श्रमिक । इन तीनों स्वरूपों में कम-से कम, आय में अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने का प्रयत्न करता है और आर्थिक सिद्धांत यहाँ उसकी सहायता करते हैं ।



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