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‘अपना पराया’ पाठ में अपने पढ़ा कि तुचा हमारे शरीर कि रक्षक है| आप तुचा कि रक्षा किस प्रकार कर सकते है

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हमारी त्वचा मुख्यतः दो काम करती है, एक तो यह हमारी शरीर में नमी बनाए रखती है | दूसरे वातावरण में मौजूद इन रोगाणुओं को शरीर के भीतर कोशिकाओं तक पहुंचने से रोके रखती हैं | रोगाणु त्वचा पर चिपक कर रह जाते हैं जो नहाते समय साबुन में मौजूद तत्व से मर जाते हैं और पानी के साथ बह जाते हैं कई बार साबुन ना होने पर हम रात यह साफ मिट्टी से भी रगड़ कर हाथ धोते हैं उससे भी पूरी तरह ना सही लेकिन बड़ी संख्या में रोगाणु त्वचा से हट जाते हैं | इस तरह देखे तो त्वचा किले की बाहरी दीवार का काम करती है जिसे शत्रु सेना को भीतर प्रवेश नहीं करने देती। आपने देखा होगा कि अगर किसी चोट के कारण हमारी त्वचा कट जाती है तो समानता दो-तीन दिन में वहां त्वचा की नई परत बन जाती है।

त्वचा की रक्षा के के लिए कट या फट जाने पर हम उसे धूल के कणों वायु और पानी से बचाते हैं उसे ढक कर रखते हैं कई बार सावधानी बरतने के लिए हम कोई एंटीसेप्टिक क्रीम अथवा उसके उपलब्ध न होने पर देसी घी इत्यादि का लेप लगा लेते हैं। चोट वाले स्थान को साफ सुथरा रखना चाहिए। नियमित रूप से नहाना और त्वचा को साफ रखना चाहिए।  




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