1.

⦁    अनुभव एवं प्रशिक्षण द्वारा व्यवहार में जो परिवर्तन होता है, उसे…………..कहते हैं।⦁    अनुभव और प्रशिक्षण के फलस्वरूप व्यवहार को अपेक्षाकृत स्थायी और प्रगतिपूर्ण परिवर्तन ही……..”है।⦁    वुडवर्थ के अनुसार अपने पूर्व व्यवहार में ……………. करना ही ‘सीखना’ कहलाती है।⦁    अधिगम की प्रक्रिया ………..चलती है।⦁    अधिगम की प्रक्रिया पर शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का ………….⦁     प्रतिकूल वातावरण सीखने की प्रक्रिया में ………….. होता है।⦁    दण्ड एवं निन्दा का सीखने की प्रक्रिया पर ………… प्रभाव पड़ता है।⦁    पुरस्कार और प्रशंसा का सीखने की प्रक्रिया पर………… प्रभाव पड़ता है।⦁    परिपक्वता के लिए …………आवश्यक नहीं है। ⦁    परिपक्वता के अभाव में सीखने की प्रक्रिया…….।⦁    परिपक्वता के अभाव में सीखना सम्भव नहीं तथा सीखने के अभाव में परिपक्वता ….. है।⦁    किसी व्यक्ति की शारीरिक क्रियाओं और शारीरिक व्यवहार को देखकर सीखने की विधि को………..कहते हैं।⦁    अनुकरण विधि द्वारा सीखने में ……….की अधिक आवश्यकता नहीं होती।⦁     सीखने की प्रयास एवं भूल विधि का सर्वप्रथम प्रतिपादन ने किया था।⦁    प्रयास एवं भूल विधि को सत्यापित करने के लिए थॉर्नडाइक ने अपना प्रयोग …… पर किया था।⦁    मैक्डूगल ने प्रयास एवं भूल विधि को दर्शाने के लिए अपना प्रयोग………पर किया था।⦁    गैस्टाल्टवादी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार सीखने की प्रक्रिया ………. द्वारा सम्पन्न होती है।⦁    कोहलर तथा कोफ्का ………….. मनोवैज्ञानिक थे।⦁    कोहलर ने चिम्पैंजी पर प्रयोग करके सीखने के……….. सिद्धान्त का प्रतिपादन किया।⦁    कोहलर ने ‘अन्तर्दृष्टि द्वारा सीखने’ विषयक प्रयोग………..पर किया था।⦁    व्यवहारवादियों द्वारा प्रतिपादित सीखने के सिद्धान्त को ………………कहते हैं।⦁    प्राचीन अनुबन्धन के सिद्धान्त का प्रतिपादन……….. ने किया।⦁    प्राचीन अनुबन्धन पर प्रयोग किया था ⦁    प्राचीन अनुबन्धन के स्थापित होने में ………..तथा  का महत्त्व है। ⦁    पैवलोव ने अपने सीखने के सिद्धान्त को प्रतिपादित करने के लिए…………पर प्रयोग किया था।⦁    किसी उद्दीपक से होने वाली प्राकृतिक या स्वाभाविक अनुक्रिया जब उससे भिन्न किसी अन्य उद्दीपक वस्तु या परिस्थिति से उत्पन्न होने लगे तो उस प्रक्रिया को …………….कहते हैं।⦁    सीखने के नैमित्तिक अनुबन्धन सिद्धान्त का प्रतिपादन…………… ने किया है।⦁     सीखने के नियमों के प्रमुख प्रतिपादक………… माने जाते हैं।⦁    थॉर्नडाइक द्वारा प्रतिपादित सीखने के प्राथमिक नियमों की संख्या ………….हैं। ⦁    सीखने की प्रक्रिया में वह अवस्था जब सीखने में प्रगति नहीं होती है कहलाती है। ⦁    यदि सीखने के वक्र में सीखने की प्रगति कुछ दूर तक रुकी हुई दिखाई देती है तो इससे ………का पता चलता है⦁    किसी व्यक्ति द्वारा किसी एक परिस्थिति में सीखे गये कार्य को किसी अन्य परिस्थिति मेंउपयोग में लाना ………… कहलाता है। ।⦁    यदि पूर्व में किया गया अधिगम बाद में किये जा रहे अधिगम अन्तरण में बाधक हो रहा हो, तो इस प्रकार के अधिगम अन्तरण को कहा जाता है।⦁    ……………ऋणात्मक और शून्य स्थानान्तरण अधिगम स्थानान्तरण के प्रकार हैं।⦁    पशुओं का अधिकांश सीखना…………प्रकार का होता है, जबकि मानव का अधिकांश सीखना वाचिक प्रकार का होता है। 

Answer»

1. सीखना या अधिगम, 

2. अधिगम

3. परिवर्तन, 

4. जीवन-पर्यन्त,

5. प्रभाव पड़ता है, 

6. बाधक, 

7. प्रतिकूल, 

8. अनुकूल, 

9. अधिगम, 

10. सुचारु रूप से नहीं चल सकती, 

11. व्यर्थ, 

12. अनुकरण, 

13. सूझ-बूझ, 

14. थॉर्नडाइक, 

15. बिल्ली, 

16. चूहों, 

17. सूझ या अन्तर्दृष्टि, 

18. गैस्टाल्टवादी, 

19. सूझ या अन्तर्दृष्टि, 

20. चिम्पैंजी, 

21. सम्बद्ध प्रत्यावर्तन, 

22. पैवलोव, 

23. पैवलोव ने, 

24. उद्दीपन, अनुक्रिया, 

25. कुत्ते, 

26. सम्बद्धता, 

27. स्किनर, 

28. थॉर्नडाइक, 

29. तीन, 

30. पठार, 

31. सीखने के पठार, 

32. अधिगम का स्थानान्तरण, 

33. ऋणात्मक अधिगम-स्थानान्तरण, 

34. धनात्मक, 

35. क्रियात्मक।



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