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सर्वप्रथम मैं पड़ोस में जाकर उन्हें एक क्षण के लिए शांत करूँगा। फिर सारे मामले को समझूँगा की दुश्मनी आखिर हो किस बात पर रही है , फिर शांति को प्रस्ताव दोनों के समक्ष रखकर प्रेम से बात करूँगा , यदि अगर वे फिर भी शांत नहीं होते तो मैं दोनों की बात सुनकर यह समझूँगा की उस दुश्मनी के पीछे किसका हाथ है , फिर दोनों में से जिसकी गलती होगी , मैं उसको समझूंगा की दुश्मनी मत करो गलती तुम्हारी है अपनी गलती स्वीकार करो और माफ़ी मागो और यदि वो मुझ पर ही क्रोध करेगा तो मैं उसके खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाऊंगा [ क्योकि मैं एक शांति दूत हूँ , और एक शांति दूत का कर्त्तव्य होता है कि वह शांति को बनाये रखे अगर शांति के मध्य मैं कोई भी समस्या उत्पन्न हो , उसे जड़ से उखाड़ फेके और जरूरत पड़ने पर युद्ध भी करे]
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