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अनखाते हुए बस से उतरा कि जहाँ था वहीं पत्थर की मूर्ति-सा स्तब्ध खड़ा रहा गया।” कौन स्तब्ध खड़ा रह गया तथा क्यों?

Answer»

लेखक जब कौसानी के बस-अड्डे पर बस से उतरा तो वह अत्यन्त खिन्न था। जहाँ वह बस से उतरा था, वहाँ से उसकी निगाह एक ओर पड़ी। उसने देखा कि सामने की घाटी अपार प्राकृतिक सौन्दर्य से भरी थी। पचासों मील चौड़ी इस घाटी में लाल-लाल रास्ते थे। ये गेरू की शिलाओं के काटने से बने थे। उनके किनारे सफेद थे। उसमें अनेक नदियाँ बह रही थीं। उसमें हरे-भरे खेत थे। पूरी घाटी अत्यन्त सुन्दर थी। लेखक उसे देखता ही रह गया और जहाँ था वहाँ पर ही स्तब्ध खड़ा रह गया।



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