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अधिकारों के प्राकृतिक सिद्धान्त पर टिप्पणी लिखिए।

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हॉब्स, लॉक तथा रूसो आदि विद्वानों ने अधिकारों के प्राकृतिक सिद्धान्त का समर्थन किया है। यह सिद्धान्त अति प्राचीन है। इस सिद्धान्त की मान्यता है कि अधिकार प्रकृति-प्रदत्त हैं। तथा व्यक्ति को जन्म लेते ही प्राप्त हो जाते हैं। राज्य इन अधिकारों को नहीं छीन सकता, क्योंकि एक तो वह इनका जन्मदाता नहीं है और दूसरे व्यक्ति राज्य के उदय से पूर्व से ही इन अधिकारों का प्रयोग करता आ रहा है।

इस सिद्धान्त में निम्नलिखित दोष पाये गये हैं-
⦁    यह सिद्धान्त काल्पनिक है न कि ऐतिहासिक।
⦁    ग्रीस का मत है कि समाज से पृथक् किसी अधिकार की कल्पना नहीं की जा सकती।
⦁    यह सिद्धान्त राज्य को अनुचित रूप से कृत्रिम संस्था मानता है।
⦁    यह सिद्धान्त कर्तव्यों के प्रति मौन है, जब कि कर्तव्य के अभाव में अधिकारों का अस्तित्व सम्भव नहीं है।



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