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अभिलेखशास्त्रियों की कुछ समस्याओं की सूची बनाइए। |
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Answer» अभिलेखशास्त्रियों की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित थीं 1. उन्हें अभिलेखों की लिपियों को पढ़ने में कठिनाई आती थी, क्योंकि जिन युगों के वे अभिलेख होते हैं, उनके समकालीन अभिलेखों पर कहीं भी उस लिपि का प्रयोग नहीं हुआ होता। उदाहरण के लिए-हड़प्पा सभ्यता की मोहरों और अन्य वस्तुओं पर दिये गये लेखों को अभी तक नहीं पढ़ा जा सका है 2. कुछ अभिलेखों में एक ही राजा के लिए भिन्न-भिन्न नामों/उपाधियों अथवा सम्मानजनक प्रतीकों और संबोधनों का प्रयोग किया गया है। इसलिए अभिलेखशास्त्री को उन्हें पढ़ने या उनका अर्थ निकालने में काफी कठिनाई होती है। 3. कई बार एक ही शासक या उसके वंश से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों के देशों में फ्लिने वाले अभिलेखों में लगभग एक ही युग में भिन्न-भिन्न भाषाओं और लिपियाँ का प्रयोग हुआ है। फलतः अभिलेखशास्त्रियों को इन्हें पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। 4. अभिलेखशास्त्री कुछ अभिलेखों पर अंकित लिपि को पढ़ने में असमर्थ होते हैं क्योंकि उनके समकालीन अभिलेखों पर कहीं भी उस लिपि का उल्लेख नहीं मिलता। दो भाषाओं के समानांतर प्रयोग के अभाव में अभिलेखशास्त्री असहाय हो जाते हैं। 5. अशोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत में हैं, जबकि परिचश्मोत्तर से मिले अभिलेख अरोमाइक और यूनानी भाषा में हैं। प्राकृत के अधिकांश अभिलेख ब्राह्मी लिपि में लिखे गए थे, जबकि पश्चिमोत्तर के कुछ अभिलेख खरोष्ठी में लिखे गए थे। अरामाइक और यूनानी लिपियों का प्रयोग अफ़गानिस्तान से मिले अभिलेखों में किया गया। 6. प्रायः अभिलेखों में प्रयुक्त वाक्यों से उनके अर्थ को समझने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। उदाहरणार्थ अशोक की कलिंग विजयोपरांत तेरहवें शिलालेख में लिखा है-“डेढ़ लाख पुरुषों को निष्कासित किया गया; एक लाख मारे गए और इससे भी ज्यादा की मृत्यु हुई।” यह भाषा काफी भ्रमात्मक है। |
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