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‘आवत जात पन्हैया घिस गई बिसर गयो हरि नाम ।’

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प्रस्तुत पंक्तियाँ अष्टछाप के प्रसिद्ध ब्रजभाषा कवि कुंभनदास द्वारा लिखी गई है । एक बार अकबर बादशाह के बुलाने पर इन्हें फतेहपुर सीकरी जाना पड़ा । जहाँ इन्हें सम्मानित किया गया । किन्तु आने-जाने में इनके जूते घिस गये और हरि नाम का स्मरण करना भूल गये । उन्हें हरि स्मरण का समय ही नहीं मिला । और जिन्हें देखने मात्र से पीड़ा होती है उनको भी झुककर सलाम करना पड़ा ।



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