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आश्रम के विद्यार्थी के साथ गाँधीजी ने क्या व्यवहार किया? इस व्यवहार का उस पर क्या प्रभाव पड़ा? |
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Answer» आश्रम में एक छात्र बहुत ऊधम मचाता थी। किसी से नहीं दबता था। दूसरों से लड़ता-झगड़ता था। एक दिन उसने बहुत ऊधम मचाया। समझाने पर भी नहीं समझा और गाँधी को धोखा दिया। इस पर गाँधीजी ने उसे रूल उठाकर मारा। मारते समय गाँधीजी काँपे, विद्यार्थी रोया, उसे चोट लगी । गाँधीजी का दिल भी दुखी हुआ। गाँधी को उसे मारने का पछतावा अन्त तक रहा। गाँधीजी को लगा कि उसे मारकर उन्होंने अपनी आत्मा का नहीं अपनी पशुता का ही दर्शन कराया है। |
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