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“आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतन्त्रता एक भ्रम है।” इस कथन की विवेचना कीजिए। |
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Answer» लॉस्की, रूसो, मैकाइवर, सी०ई०एम० जोड आदि विचारक स्वतन्त्रता एवं समानता को एक-दूसरे को पूरक मानते हैं। इन विद्वानों का मत है कि आर्थिक समानता के अभाव में स्वतन्त्रता का अस्तित्व निरर्थक है। प्रो०.पोलार्ड के अनुसार, “स्वतन्त्रता की समस्या का केवल एक हल है और वह हल समानता में निहित है।” सी०ई०एम० जोड के अनुसार, “स्वतन्त्रता का विचार, जो राजनीतिक विचारधारा में बहुत महत्त्वपूर्ण है, जब आर्थिक क्षेत्र में लागू किया गया तो उससे विनाशकारी परिणाम निकले, जिसके फलस्वरूप समाजवादी और साम्यवादी विचारधाराओं का उदय हुआ, जो आर्थिक समानता पर विशेष बल देती है और जिनकी यह निश्चित धारणा है कि आर्थिक समानता के अभाव में वास्तविक राजनीतिक स्वतन्त्रता कदापि प्राप्त नहीं हो सकती।’ वास्तविकता यह है कि आर्थिक समानता सभी प्रकार की स्वतन्त्रताओं का आधार है और आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतन्त्रता केवल एक भ्रम है। प्रो० जोड के अनुसार, “आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतन्त्रता एक भ्रम है।” विद्वानों का मत है कि जब तक प्रत्येक नागरिक को आर्थिक क्षेत्र में समान अवसर प्रदान किये जाते हैं तब तक राजनीतिक स्वतन्त्रता की अवधारणा केवल एक भ्रम है। उनका मानना है कि यदि समाज में आर्थिक समानता नहीं है तो धनिक वर्ग अन्य वर्गों का शोषण करेगा तथा उनकी राजनीतिक स्वतन्त्रता को भी प्रभावित करेगा। ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाएगी कि राजनीतिक सत्ता पूँजीपतियों में निहित हो जाएगी और राजनीतिक स्वतन्त्रता तथा समानता केवल शब्दों तक ही सीमित रह जाएगी। इस विचारधारा को मानने वाले विद्वान् निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत करते हैं |
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