1.

आर्थिक प्रवृत्तियाँ धन्धा तथा वाणिज्य को गतिशील रखती हैं ।

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व्यापार तथा वाणिज्य में वस्तु के उत्पादन से लेकर उसके उपयोग तक की समग्र प्रवृत्तियों का समावेश होता है । उसमें व्यापार की सहायक सेवाएँ जैसे बैंक, वाहन-व्यवहार, बीमा, संदेशा-व्यवहार, गोदाम व प्रतिनिधि इत्यादि का भी समावेश किया जाता है । व्यापारिक लेन-देन की प्रवृत्ति, माल एवं मुसाफिरों का स्थानान्तरण करने के लिए वाहन-व्यवहार की प्रवृत्ति, संदेशा-व्यवहार की प्रवृत्ति, जोखिम के सामने रक्षण की प्रवृत्ति, माल के संग्रह की प्रवृत्ति तथा प्रतिनिधि की सेवा की प्रवृत्ति इत्यादि सभी आर्थिक प्रवृत्तियाँ वाणिज्य की प्रवृत्ति से ही प्रारम्भ रह सकती हैं । इस तरह आर्थिक प्रवृत्ति व्यापार एवं वाणिज्य को गतिशील रखती है ।



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