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आपु आपु कहँ सब भलो,अपने कहँ कोई कोई.तुलसी सब कहँ जो भलो,सुजन सराहिय सोई.तुलसीदास के दोहे का अथ बताए

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                   आपु आपु कहँ सब भलो,अपने कहँ कोई कोई.

                   तुलसी सब कहँ जो भलो,सुजन सराहिय सोई

इस दोहे में तुलसीदास जी ने आज स्पष्ट किया है कि परोपकार करने वाले व्यक्ति की ही इस संसार में सराहना होती है। अपने लिए तो सभी भले होते हैं और सभी अपने लिए भलाई का कार्य करने में लगे रहते हैं। किंतु कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो स्वयं का भला करने के साथ-साथ भी अपने मित्रों एवं सम्बन्धियों के भले के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। तुलसीदास जी कहते हैं कि इनसे भी श्रेष्ठ वे व्यक्ति होते हैं जो सभी का भला मानकर उनकी भलाई करने में लगे रहते हैं। इस प्रकार के व्यक्तियों की ही सज्जन व्यक्तियों के द्वारा सराहना की जाती है।



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