| 1. |
आजाद हिन्द फ़ौज पर विस्तारपूर्वक नोट लिखो। |
|
Answer» आजाद हिन्द सेना की स्थापना की पृष्ठभूमि- आजाद हिन्द सेना की स्थापना रास बिहारी बोस ने जापान में की थी। द्वितीय विश्व युद्ध के समय जापान ब्रिटिश सेना को पराजित करके बहुत-से सैनिकों को कैदी बना कर जापान ले गया था। उनमें अधिकांश सैनिक भारतीय थे। इन सैनिकों को लेकर रास बिहारी बोस ने कैप्टन मोहन सिंह की सहायता से ‘आज़ाद हिन्द सेना’ बनाई। रास बिहारी बोस आज़ाद हिन्द सेना का नेतृत्व सुभाष चन्द्र बोस को सौंपना चाहते थे। उस समय सुभाष जी जर्मनी में थे। अतः रास बिहारी बोस ने उन्हें जापान आने का आमन्त्रण दिया। जापान पहुंचने पर सुभाष बाबू ने आज़ाद हिन्द सेना का नेतृत्व सम्भाला। तभी से वह नेताजी सुभाषचन्द्र के नाम से लोकप्रिय हुए। आज़ाद हिन्द सेना का स्वतन्त्रता संघर्ष-
आजाद हिन्द सेना की असफलता (वापसी)- आजाद हिन्द सेना को जापान से मिलने वाली सहायता बन्द हो गई । सैन्य सामग्री के अभाव के कारण आज़ाद हिन्द सेना को पीछे हटने के लिए बाध्य होना पड़ा। पीछे हटने पर भी आजाद हिन्द सेना का मनोबल कम नहीं हुआ। परन्तु 18 अगस्त, 1945 ई० को फार्मोसा में एक विमान दुर्घटना में नेता जी का निधन हो गया। अगस्त, 1945 ई० में जापान ने भी आत्म-समर्पण कर दिया। इसके साथ ही आज़ाद हिन्द सेना द्वारा प्रारम्भ किया गया स्वतन्त्रता का संघर्ष समाप्त हो गया। आज़ाद हिन्द सेना के अधिकारियों की गिरफ्तारी एवं मुकद्दमा- ब्रिटिश सेना ने आजाद हिन्द सेना के कुछ अधिकारियों तथा सैनिकों को इम्फाल के मोर्चे पर पकड़ लिया। पकड़े गए तीन अधिकारियों पर दिल्ली के लाल किले में देशद्रोह का मुकद्दमा चलाया गया। न्यायालय ने निर्णय दिया कि तीनों दोषियों को फांसी के तख्ते पर चढ़ाया जाए, परन्तु जनता के जोश को देख कर सरकार घबरा गई। अतः उन्हें बिना कोई दण्ड दिये रिहा कर दिया गया। यह रिहाई भारतीय राष्ट्रवाद की एक महान् विजय थी। |
|