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रीतिकालीन कवियों में देव को अत्यंत प्रतिभाशाली कवि माना जाता है। देव की काव्यगत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं–1.देवदत्त ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि हैं।2.कवित्त एवं सवैया छंद का प्रयोग है।3.भाषा बेहद मंजी, कोमलता व माधुर्य गुण को लेकर ओत-प्रोत है।4.देवदत्त ने प्रकृति चित्रण को विशेष महत्व दिया है।5.देव अनुप्रास, उपमा, रूपक आदि अलंकारों का सहज स्वाभाविक प्रयोग करते हैं।6.देव के प्रकृति वर्णन में अपारम्परिकता है। उदाहरण के लिए उन्होंने अपने दूसरे कवित्त में सारी परंपराओ को तोड़कर वसंत को नायक के रुप में न दर्शा कर शिशु के रुप मेंचित्रित किया है।



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